Thursday, 25 October 2012

क्या भारत मैं हिंदू धर्म खतरे मैं है

क्या भारत मैं हिंदू धर्म खतरे मैं है सुनने मैं विरोधाभास प्रतीत होता है . जिस देश मैं आबादी का अस्सी प्रतिशत हिंदू हो उस देश मैं हिंदू धर्म को कैसा खतरा ? जिसे हज़ार साल की गुलामी नहीं मिटा पाई , जिसे गजनी से औरंगजेब तक की यातनाएं नहीं मिटा पायीं उसे अपने ही राज मैं कैसा खतरा ? प्रश्न जायज़ है इस लिए इसका उत्तर आवश्यक है . स्वतंत्रता के बाद किताबों के स्वरुप को देखिये . १९६५ तक किताबों मैं वाल्मीकि , तुलसीदास , दधिची , राजा मोरध्वज की कहानियां होती थी . सूरदास , मीरा , रसखान इत्यादि की रचनाएँ होती थी . हिंदी भाषा के प्रति समर्पण था .राष्ट्र के प्रति गौरव व अभिमान था . हिंदू त्योहारों पर छुटियाँ होती थी. अब रक्षाबंधन , जन्माष्टमी , राम नवमी की छुट्टियाँ खतम हो गयी . छुट्टी ना होने से त्यौहार मनाना भी बहुत कम हो गया . बसंत पंचमी की जगह वलेंतिने दिवस मानाने की मुहीम कौन चला रहा है ? हमारी आस्था के केन्द्रों की दुर्गति देखिये ? शंकराचार्य को जेल मैं रखा हम चुप रहे . कश्मीरी पंडितों को देश निकाला दे दिया हम चुप रहे . स्वामी रामदेव पर आधी रात पुलिसिया ज़ुल्म धाए गये हम चुप रहे . अयोध्या मैं मुलायम सिंह ने सैकड़ों को गोली से मार दिया हम चुप रहे . अब डीएवी स्कुल भी हिंदू संस्कृति की बातें नहीं पढ़ा सकते . मुसलमान अपनी शिक्षा दे सकता है , सिख दे सकते हैं , ईसाई दे सकते हैं पर सिर्फ हिंदू नहीं दे सकता क्यों? धर्म निरपेक्षता की यह कुत्सित परिभाषा तो संविधान मैं नहीं थी. सन १९७० तक भी ऐसा नहीं था . तो फिर यह सब कैसे हो गया ? रावण को हनुमान या सुग्रीव ने नहीं बल्कि उसके मिथ्याभिमान व लंकावासी विभीषण ने मरवाया था . आज हमारे यहाँ मिथ्याभिमान व विभीषण दोनों प्रचुर मात्र मैं हैं . पहले विभीषण को लें . कौन हमारे समाज मैं घरके भेदी विभीषण हैं . देश का पहला व सबसे खतरनाक विभीषण मिडिया है जो पूर्णतः विदेशियों के कब्जे मैं है .यही सिर्फ मोदी की धज्जी उडाता रहता है और पंडितों के हत्यारों की कोई बात नहीं करता . यही हमारे पतन का मुख्या कारण है . कश्मीर पर कोई दर्द नहीं पर सारा दुःख दर्द गोधरा पर रहता है . दूसरा कारण है कि हिंदू धर्म का यह नया पतन कोंग्रेस के पतन से जुड़ा है. चरण सिंह व अन्य लोगों के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस मुसलामानों के वोटों कि मोहताज़ हो गयी .उनके एक मुशत वोट देने से धीरे धीरे उनके बिना मांगे हिंदुओं को नीचा दिखाने का कार्यक्रम शुरू हो गया . इसकी शुरुआत हुयी हिंदू त्योहारों की छुट्टी काटने से .अंत मैं अत्याचार का अंत हुआ डॉक्टर करण सिंह की एकता यात्रा से और बाद मैं बीजेपी के उत्थान से . परन्तु मुट्ठी भर मुसलामानों के वोट पर निर्भर अन्य पार्टियों ने बीजेपी को उन्हीं के राज मैं हिजड़ा बना दिया . नीतिश कुमार ने मात्र कमिश्नर के तार पर अयोध्या की सारी गाडियां बंद कर दी और बीजेपी सिर्फ गटबंधन का धर्म निभाती रही. अंत मैं जनता ने ही बीजेपी को गटबंधन से मुक्त कर दिया और वह आज भी सत्ता का रास्ता खोज रही है. अब पछताए क्या होता जब चिड़िया चुग गयी खेत ! परन्तु हिंदू धर्म के साथ हमारा स्वाभिमान , अस्मिता व पूरा अस्तित्व जुडा हुआ है. आज देश मैं किसे स्वाभिमान है , कौन स्वदेशी की बात सोच रहा है , कौन सत्य की रक्षा कर रहा है, कौन गरीबी मैं भी गर्व से मात्र स्वाभिमान की अमानत लिए ढाल लिए खड़ा है जिसे कोई पैसे की तलवार नहीं काट सकती . धर्मनिरपेक्षता की संविधान मैं कोई जरूरत नहीं थी. सेकुलर इंग्लॅण्ड मैं भी ब्लास्फेमी कानून के चलते इसायी धर्म की अवमानना अपराध है . इस एक सेकुलर शब्द ने देश का बहुत नुक्सान किया है और इसे संविधान के संशोधन से हटाने की आवश्यकता है. हिंदू धर्म सर्व धर्म सम मैं विश्वास करता है .पर सिर्फ हिंदू स्कूल मैं शिक्षा नहीं दे सकता बहुत ज्यादिति है . हमारे मंदिरों मैं सरकार का दखल बंद करो. मंदिरों के चढावे का सिर्फ हिंदू धर्म के प्रसार मैं उपयोग करो. मीडिया का हिंदुओं के विरूद्ध छद्म युद्ध पूरी तरह से उजागर करो व मीडिया के डंक से सब की रक्षा करो . अपने श्रेष्ठ होने का मिथ्याभिमान छोडो . नयी पीढ़ी पूरी तरह से हिंदू संस्कृति से अनभिज्ञ है. उसे पुनः धर्म कि मुख्य धारा से जोड़ना आवश्यक है . इस बात को समझ लीजिए कि अपनी खोयी हुयी आस्था हिंदू धर्म के पतन का मुख्या करण बनेगी .इस आस्था के दीप को पुनः प्रज्वलित करना हम सबका कत्र्तव्य है . यदि हम समय रहते नहीं चेते तो ना ही हिंदू धर्म बचेगा ना ये देश .