Wednesday, 21 November 2012

कसाब की मौत फांसी से नहीं हुई है

*** कसाब की मौत से खड़े होने वाले सवाल और उनके जवाब , जो की सबूत का भी काम कर रहे है की कसाब की मौत फांसी से नहीं हुई है ! ?? ***

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 1. मुझे कसाब का डेथ वारंट नही दिखाया गया और न ही दिया गया था : कसाब के वकील का बयान
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2. कसाब को तुरंत ही यरवदा जेल में ही दफना दिया गया -- मुख्यमंत्री महाराष्ट्र
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3. नियमानुसार यदि किसी मुस्लिम को फ़ासी दी जाए और यदि उसके शव को लेने वाला कोई न हो तो उसके शव को उस शहर के मुस्लिम धर्म के किसी संस्था को सौप दिया जाता है ताकि उसका अंतिम संस्कार उसके धर्म के अनुसार हो सके -- ये जेल में मैन्युल में भी है
फिर कसाब का शव जेल में ही बिना किसी धर्मगुरु के कैसे दफना दिया गया ?
एक झूठ को छिपाने के लिए सरकार कितने झूठ बोलेगी ?
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4. फाँसी की वीडियोग्राफी तो हुई होगी, फाँसी पर लटकने और उससे पहले तक के वीडियो जारी होने चाहिए.....
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5. महाराष्ट्र पुलिस के एसीपी प्रद्युम्न ने भी कसाब की फांसी पर सवाल उठा दिया है .. उनके अनुसार कसाब की मौत डेंगू से हुई है
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6. जेल मैन्यूल के अनुसार किसी भी अपराधी को जब तक फासी नही दी जा सकती तब तक वो पूरी तरह स्वस्थ न हो लेकिन कसाब को डेँगु होने के बाद तो ये संभव ही नही है
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7.अफजल गुरु की फांसी के मामले में जब भी गृहमंत्री और दिल्ली सरकार और कांग्रेस के प्रवक्ताओ से पूछा जाता रहा है उनका एक ही दलील होता था की राष्ट्रपति के पास गृहमंत्रालय क्रम से फ़ाइल भेजता है ..और अफजल गुरु के पहले १२ आरोपिओ की फ़ाइल लम्बित पड़ी है |

मित्रो, आज के समय में राष्ट्रपति के पास फांसी की कुल १७ फ़ाइल थी जिसमे कसाब की १७ वा नम्बर था फिर अगर कांग्रेस की दलील को सच माना जाये की भारत सरकार आरोपियों को क्रम से फांसी देती है तो फिर कसाब को बिना बारी के फांसी कैसे हो गयी ?
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8. गृहमंत्री ने कसाब को फांसी देने वाले जल्लाद का नाम बताने से इंकार किया .. लेकिन क्यों ?
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9. जेल कानूनों के बाद सूर्यास्त के बाद किसी भी जेल से किसी भी कैदी को किसी दुसरे जेल में शिफ्ट नही किया जा सकता ..
फिर कसाब को रात को आठ बजे आर्थर रोड जेल से कैसे बाहर निकला गया होगा ?
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१-कोई भी प्रशासन फांसी दिए जाने से पहले राज्य सरकार को सूचित करती है |

२-कोई भी प्रशासन फांसी दिए जाने से पहले मुलजिम के घर पर फांसी की तिथि और समय सूचित करता है अगर मुलजिम विदेशी है तो सम्बंधित देश के दूतावास को खबर दी जाती है |

३-फांसी देने से पहले मुलजिम के वकील और विपक्ष के वकील दोनों को जानकारी देना आवश्यक है और उक्त सभी बिन्दुओं में सुचना सरकारी डाक के माध्यम से दी जानी आवश्यक है जो की भविष्य में साक्ष्य के रूप में काम आती है |

४-मुलजिम यदि बीमार है तो उसको फांसी नहीं दी जा सकती , अगर फांसी की तिथि तय भी है तो उसको आगे बढाया जाएगा और कसाब को डेंगू था जगजाहिर है और डेंगू के मरीज़ को पूर्ण स्वस्थ होते होते ३ महीने का समय कम से कम लग जाता है |

५-फांसी के बाद मुलजिम के शारीर को उसके देश भेजने का प्रवधान होता है , पकिस्तान कसाब को अपना नहीं मानता इस सूरत में उसकी कब्र भारत में ही खुदेगी किन्तु सरकार कसाब की कब्र के बारे में जनता को नहीं बता रही है ,, जिस कब्रिस्तान में कसाब को गाड़ा जाएगा वहां के लोग कब्र के विषय में जान जायेगे और हो सकता है उसको भी गाजी पाजी जैसे आतंकियों की तरह मज़ार बना कर सजदा करवाया जाए जो की एक प्रकार से कानून का ही उलंघन है |

अब बात करते है कसाब को इस तरह से फांसी दिए जाने के पीछे छुपे षड्यंत्र पर |

१-अफज़ल गुरु जैसा आतंकी अभी तक जिन्दा है जबकि उसको फांसी की सजा हुए काफी समय निकल गया है | फिर कसाब को सिर्फ ४ साल में ही फांसी क्यों ?

२-कसाब को फांसी की तैयारी इतनी गुपचुप क्यों की गयी ?

३-अगर सरकार को कसाब की फांसी की खबर उजागर होने पर माहोल बिगड़ने का खतरा था तो वह कौन लोग थे जो इस आतंकी का साथ देते ? उन लोगो का चेहरा भी सामने आना चाहिए था ?

४-कसाब को फांसी देनी ही थी तो जनता को बता कर क्यों नहीं दी गयी ? आखिर वो कोई नेता अभिनेता तो नहीं था जो सरकार एक आतंकी को फांसी देने में इतना डर रही थी और फांसी को गुपचुप तरीके से अंजाम तक पहुचाया गया |

५- चलो मान लिया की सुरक्षा कारणों से कसाब की फांसी को गुप्त रखना आवश्यक था तब अभी तक उसके फांसी से पहले के और फांसी के समय के , फांसी के बाद के , पोस्टमार्टम से पहले और बाद के फुटेज क्यों जारी नहीं किये गए ?

६-सबसे अहम् बात यह की भारत की जनता की निगाहे अफज़ल गुरु और कसाब को फांसी होते देखना चाहती थी , जनता में इन दोनों के प्रति एक रोष था | सरकार के अनुसार उसने २६ / ११ / २००८ को मुम्बई में बलिदान गए १६६ लोगो को श्रधांजलि दी है | क्या श्रधांजलि देने का सही समय २६/११/२०१२ नहीं था जो मुम्बई में बलिदान हुए लोगो की वरसी के दिन फांसी देकर दिया जाता | फिर केवल ५ दिन पहले अत्यधिक गोपनीय और शीघ्रता दिखाते हुए फांसी दिए जाने का क्या ओचित्य ?

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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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