Friday, 9 November 2012

शुभ दीपावली कैसे मनायें ?

एस बार दीपावली  भारतीय तरीके से मनाये
सबसे पहले तो आप इसे दीपावली बोले न की दीवाली , दीपावली का मतलब होता है "दियो को पंक्ति (LINE)" , आप मोमबत्ती जला कर मोमावली ना मनाये. क्योकि इससे आपकी ईसाई चर्च के मानसिक गुलामी नजर आ जाएगी
इसके आलावा , दुनिया भर में आतंक का पैगाम , और बन्दूक/तलवार की नोक पर ७० मुस्लिम देश बनाने वाले मुस्लिमो की तरह आप "दिवाली मुबारक" बोलकर आपके खून में हुई मुस्लिम मिलावट का प्रदर्शन न करे तो ज्यादा बेहतर होगा | मुझे बड़ा दुःख पहुचता है जब दिवाली मुबारक बोलकर लोग आजकल ईद मुबारक की भांति कंधे से कंधे मिलते दिख जाते है | में अंदर ही अंदर समझ जाता हूँ की मुस्लिम आक्रंताओ ने तो धरम परिवर्तन तो किया ही था.. इसके साथ साथ लाखो करोडो औरतो का शील भंग भी  किया था.. अब भाई मिलावट वाला खून कभी तो असर दिखायेगा ना
दीप ख़रीदे तो मिटटी की दिए ही ख़रीदे , इसके आपका पैसा गरीब तक पहुँचेगा, माल से खरीदने से क्या फायदा,
हो सके तो गरीबो को पुराने कपडे दे देना, क्युकी अब ठण्ड चालू हो गयी है , पेट की आग से ज्यादा शारीर की ठण्ड भरी पद जाती है..
और हाँ आजकल  MADE IN CHINA सामान की भरमार है , लक्ष्मी जी भी आप विदेशी खरीदोगे तो इसका फायदा सिर्फ CHINA को होगा , तो समझदार बन CHINA की झालर पठाके न ले
इसके अलावा आपको नकली मावे की  न्यूज़ दिन भर दिखाई जाएगी , बहकावे में मत आना , ये सब विदेशी कंपनीयो की मिलीभगत है , गलती से भी आप चोकलेट लाये तो इसका सीधा फायदा विदेशी कंपनीयो को होगा , आप तो उल्लू बन जायेंगे  ! आप मावे की मिठाई ही खाना, लेकिन चाँदी का वरक वाली मत लेना,
और हाँ, पटाखे जरूर फोडे , डेन्गु के मच्छर तो मरेंगे ही मरेंगे , सेकुलर लोगो के कानो में आवाज  भी तो जानी चाहिए की "सनातनी अभी भी जिन्दा है"   
चित्र और निचे लिखा हुआ कॉपी पेस्ट है , FB से 
होली- अरे रंग हानिकारक हैं, विषाक्त हैं, प्रदूषण फैलाते हैं।
दिवाली- अरे पटाखे प्रदूषण फैलाते हैं, विषाक्त हैं, शोर होता है, खतरनाक हैं आदि आदि
गणेश चतुर्थी - मूर्ति विसर्जन मत करो.. क्योंकि वे समुद्र तट को अपवित्र करते हैं।
राम नवमी- बड़े धार्मिक जुलूस से पैसे की बर्बादी होती है।
कुंभ मेला -सरकार को प्रबंधन, सफाई, बुनियादी सुविधाओं पर करोडों रुपये खर्च करने पडते हैं।
डांडिया / नवरात्रि - इसे रोको ये युवाओं की नैतिकता को प्रभावित करता है
कारवा चौथ- यह महिलाओं पर अत्याचार है।
मंदिर घंटियाँ -ध्वनि प्रदूषण होता है।
लाउड स्पीकर- अरे बंद करो, बच्चे पढ नहीं पाते।
शोभा यात्रा भी बंद करो।

WTF is going on??
क्या किसी ने मुहर्रम और ईद पर होने वाली हजारों निर्दोष जानवरों की हत्या पर सवाल उठाया है?
क्या कोई नव वर्ष पर कोई बोलता है?
क्या आपको पता है की रोज पशुओंकी हत्या होती है उनकी खाल निकालने के लिए कितना टन पानी बर्बाद होता हैं?

इस बार दीपावली पर ऐसे पटाखे बजाओ कि मीडिया वालों के कान सुन्न हो जायें...!!






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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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