Tuesday, 12 February 2013

राममंदिर मुद्दा

अभी, एक मुद्दे पर कुछ हिंदू लोगो ने ही बोला की विवादास्पद जगह पर मस्जिद बन जाना चाहिये । कुछ तो दोनो बनाने की बोल रहे थे ।

उनके लिये जवाब

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लगता है आपने इतिहास नहीं पढा ।
मुझे आपसे इतना ही सवाल है , की अगर आपके घर में घुस कर मै जबरजस्ती इक कमरा हथिया लूँ तो क्या आप मेरा विरोध नहीं करेंगे ।
राम मंदिर , १०० करोड हिंदूओ (शायद आपको छोडकर) की श्रद्धा का सवाल है । कुछ सालो पहले बर्बर हिंसक पशओं ने हमसे छीना था, उसको लेने का हक तो है ही सहीं ।
हिंसा ना , हिंसा पाप है ये सोचते सोचते हुये, हिंदुस्तान से हजारो आक्रमण सहे है, और ४०% भारत का हिस्सा खो दिया है । जैसे आज कश्मीर हाथों से जाता हूअा लग रहा है, वैसे ही मात्र कुछ हजारों सालो में हमने अफगानिस्तान पाकीस्तान आदी को खोया है । आपको बता देना चाहता हूँ की चाणक्य जी जहाँ पढाते थे वो जगह आप अफगानिस्तान में है ।
खैर मैं आपसे ये नही कहता की जो जगह खो दी है उनके लेने के लिये आप सहमत हो, पर आप भारत के अंदर जो भूमी छीन ली गई है वो तो हम हासील कर सकते है ।

दो सिद्धांत है,आपको दो मे से एक सिद्धांत को अपनाना पडेगा
१) या तो आप ये माने की जो भूमी हम खो देते है उस पर हमारा अधिकार नहीं रहता है । जो जीता वो राजा।आप ये मानते हो की कीसी को जितना गलत बात नहीं है तो जब आप हराने का अधिकार अपने सर उठा सकते होतो जितने का क्यो नहीं । क्यों ना हम राजा बने क्योंकि आप ही मानते हो की जीतना गलत नहीं है ।

२) या तो आप ये माने की जो भूमी हम खो देते है उस पर हमारा अधिकार रहता है ।और कम से कम उसको पाने के लिये तो संघर्ष करना ही पडेगा ।

उपर के दोनो के सिद्धांत यही कहते है की चाहे आप आत्याचार के सही कहो पा गलत , लडना तो पडेगा ही ।

एक तीसरा सिद्धांत भी है । "चुप चाप रहों , आत्याचार सहन करों, नपुंसक बनो"


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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