Friday, 15 March 2013

कट्टर हिंदू

मैं मुस्लिम पर्सनल लाँ के खिलाफ हूँ , इसलिये नहीं की मै सनातनी हूँ । मै इसलिये बोल रहा हूँ क्योंकी मै  "हिंदूस्तानी" हूँ, मेरा ऐसा मानना है की जो कोई भी हिंदूस्तान मे रहता है उसके पूर्वज राम और कृष्ण है और भारतीय संस्कृती उसके अंदर होना ही चाहिये । यही भावना हमें जोडे रखती है । हमारे अंदर "हम" शब्द का प्राण ही हमारी संस्कृती है । जब भी कोई व्यक्ति धर्म विशेष (या कहे मत विशेष) के लिये आरक्षण की माँग करता है तो वो हमारे "हम" शब्द के मिटाने का प्रयास करता है , इसलिये यह एक तरह का "राष्ट्र द्रोह" है । अल्पसंख्यक आयोग भी भारत के संविधान के खिलाफ है जो कहता है सब लोग समान है। किसी भी जाती या समाज या आस्था विशेष के लोगो के विशेष अधिकार देने से उस समूह में राष्ट्रीय "हम" से अलग होकर संकीर्ण "हम" की नींव रखी जाती है इस तरह वो समूह "राष्ट्रीय विचारधारा" से अलग हो जाता है । जैसे विष्णु उपासक, शिव के उपासक, नागा साधू, आधात्यम योगी, मुनी , जैन , बौद्ध, सिख अनेका अनेक पंथी इस भारत भूमी में साथ साथ रहे है, क्योंकी  सभी ने मन से हिदू संस्कृती को माना है और राष्ट्रीय "हम" में शामील है । हम हमेशा से ही कट्टर हिंदू रहे है और इसी कारण लाखो सालो से भारत ने कभी भी किसी भी देश पर आक्रमण नहीं किया है ।  हम हमेशा से ही कट्टर हिंदू रहे है इसी कारण हमने अपने आपको और हमारी संस्कृती को जीवीत रखा है । हम सबने राष्ट्रीय "हम" को बनाये रखा है, भारत में रहने वालो को इसी "हम" को समझना होगा । उन्हे मानना होगा की यदि कोई नमाज अदा करता है पर वो है तो हिंदू ही, राम और कृष्ण की संतान है और इसी संस्कृति को मानने वाला । १००० सालो में मुस्लिमो ने कभी अलग मुस्लिम देश बनाने की माँग नहीं की । मुस्लिमो को विशेष संरक्षण दिया गया तो उन्होने संस्कृती के अलग किया और पाकीस्तान बना डाला । भारत के नेता महामूरख निकले की उसी तुस्टीकरण को बनाये रखा और स्वार्थपूर्ती के लिये भारत में हजारों दंगे करवा दिये ।
अब आप समझ गये होंगे की जातिगत या धार्मिक आरक्षण हमारी राष्ट्रीय "हम" या कहे "एकता" मे बाधक है ।

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