Tuesday, 16 April 2013

"औरतो के साथ होने वाले भेदभाव और पक्षपात" के लिये उनके "पुत्र-मोह" जिम्मेदार है


बहुत खोजविचार करके मैने ये माना और जाना है की "औरतो के साथ होने वाले भेदभाव और पक्षपात" के लिये उनके "पुत्र-मोह" जिम्मेदार है,

अगर लिखा तो शायद छोटी सी पुस्तक लिखूँ तो आपको ज्यादा समझ में आयेगा । बहरहाल, आप इन बातो को सोचिये

१) बेटा बेटी दोनो स्कूल से आते है तो माँ बेटी से क्युँ बोलती है की २ गिलास पानी ले आ, भाई को भी पिला दे । भाई अगर अपने हाथों से पानी पिने की आदत नहीं डालेगा तो अपनी पत्नी से भी यहीं अाशा रखेगा की वो भी पानी के लिये अपनी पत्नी को ही बोलेगा।
२) २० बेटे को को तरबूज के बिजे और खारक के बीट निकाल कर देनी वाली माँ ये क्युँ भूल जाती है ये सारे काम आने वाली बहू को करना पडेगा ।

आज भारतीय नरों को ये हाल है की घर के बाहर दुनिया के काम कर लेंगे लेकिन घर के अंदर "पंगू-विकलांग" बन जाते है ।
माँ अपनी किस्मत को कोसती है की उसको इतना काम करना पडता है पर ये क्यो भूल जाती है की जिस "पुत्र" को वो अपने लाड प्यार से बिगाड रही है कल वो बहू से वही सारे काम करवायेगा जो माँ खुद कर रही है ।

माँ भूल जाती है की उसकी सास ने जो पुत्रमोह में जो अत्याचार किये वो भी उसी पुत्र-मोह में अपनी बहू के साथ करने वाली है ।
माँ ही करती है भेदभाव पुत्र पुत्री के बीच, यही पहली सीढी है भेदभाव की । इसी तरह घर से मोहल्ले, मोहल्ले से गाँव, गाँव से शहर , शहर से पूरे देश में फैलता है भेदभाव ।


PSः हाँ, मै मानता हूँ की पूरूष भी भेदभाव की समस्या को हल करने में भूमिका निभा सकता है । पर पूरूष क्यों निभाये ? भाई जिसके घर में आग लगी है पानी उसे ही डालना चाहिये, पडोसी पहले आगे क्यँ आये । भाई जिसकी प्रोबल्म है उसे तो पहला कदम उठाना ही पडेगा ।

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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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