Thursday, 23 May 2013

33 देवता

  • ब्रह्मा और विष्णु गाय के दो सींगो पर
  • सभी पवित्र स्रोत और वेदव्यास सींगों के छोर पर
  • भगवान शंकर मध्य मस्तक पर
  • पार्वती मस्तक के किनारे पर
  • कार्तिकेय नाक पर, कंबल और अश्वतर देव नथुनों पर
  • कानों पर अश्विनीकुमार द्वय
  • आंखो में सूर्य और चंद्र
  • दांतों में वायु और जिह्वा पर वरुण
  • गाय के स्वर में सरस्वती
  • गलावलंब पर रक्षकगण
  • साध्य देव हृदय में
  • जांघो में धर्म
  • खुरों की फांक में गंधर्व, कोरों पर पन्नाग, बगलों में अप्सरायें
  • पीठ पर ११ रुद्र और यम, घाटी में अष्ट वसु
  • नाभि संधि मध्य पितृदेव, पेट के क्षेत्र में १२ आदित्य
  • पूंछ पर सोम, केशों पर सूर्यकिरणें, मूत्र में गंगा, लक्ष्मी-यमुना गोबर में
  • दूध में सरस्वती, दही में नर्मदा, घृत में अग्नि
  • ३३ करोड़ देव केशों में
  • पेट में पृथ्वी, स्तनों में सागर, पूरे शरीर में कामधेनु
  • भाँहों कि जड़ में त्रिगुण, केशों के कूपों में ऋषिगण, श्वास में सब पवित्र झीलें
  • ओष्ठों पर चंडिका, त्वचा पर प्रजापति ब्रह्मा
  • नथुनों पर सुगंधित पुष्प
  • कांख में साध्यदेव
  • मुख पर वेदों के ६ भाग, चरणों में चार वेद, खुरों के ऊपर यम, कुबेर और गरुड़ दक्षिण में, यक्ष वाम भाग पार्श्व में, अंदर गंधर्व
  • पांवों के अग्र में खेचर, आंतो में नारायण, अस्थियों में पर्वत, चरणों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, 'हुँ' की ध्वनि में चारों वेद


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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