Sunday, 16 June 2013

वाह री "वैनिला" के प्रति मानसिक गुलामी

क्या आपने कभी वैनिला को देखा या सूँघा है ? "वैनिला फ्लेवर" वाली आइसक्रीम से लेकर चोकलेट की भरमार है । बच्चे बच्चे से लेकर हर एक ने जो शहर में है उसने "वैनिला" का नाम तो सुना ही होगा ।

वैनिला एक "विदेशी" पौधा है । जैसे तुलसी है, इलाईची है, केसर है, इसी प्रकार का एक मसाला है ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Vanilla

मैडागास्कर और इंडोनेशिया इसका ८०% उत्पादन करता है । अगर आपको ये शुद्ध रूप में चाहिये तो आपको २५०० रूपये लीटर से ज्यादा का मिलेगा ।

बाजार में जो भी चोकलेट, पेस्ट्री या आइसक्रीम आपको मिलती है उसमें सिर्फ और सिर्फ अरटिफीशियल फ्लेवर (नकली स्वाद) होता है । इसी तरह का हाल है  |

मैने जो चित्र दे रखा है, उसमें साफ साफ लिखा है ARTIFICIAL ,
असली और नकली में क्या अंतर होता है , ये जानने के लिये आप ये समझ लिजिये की नकली स्वाद , कम से कम २००-३०० केमीकल मिलाये जाते है।

मै आपसे सिर्फ दो ही बाते बताना चाहता हूँ,

१) पहली तो ये की अगर खाना ही है तो असली वैनीला खाओं, स्वाद के नाम पर केमीकल क्युँ खा रहे हो ?

२) इस विदेशी पौधे के प्रति इतनी क्या दिवानगी की अपने देशी स्वाद भूल गये ? हमारे यहाँ की सुंगधित पौधे, अर्क की कमी है क्या, केसर, बादाम, इलाइची, गुलाब, तुलसी, इमली और पता नही कितने हजारों तरीके की खुशबू वाले पौधे पाये जाते है । देशी स्वाद के नाम पर तो हजारों तरीके की आइसक्रीम बनाई जा सकती है ।
विदेशीयों के पास कुछ होता नही है, और जो थोडा बहुत प्रकृति ने उनको भीख में दे दिया है वो उसका इस्तेमाल करते है । वैनीला उनकी मजबूरी है, पर भाई भारत जैसे देश में बाहर के पौधो की क्या जरूरत है ? ये सिर्फ और सिर्फ भारतीय लोगो की मानसिक गुलामी को दर्शाता है, कि भारतीय लोगो विदेशीयों को श्रेष्ठ मानते हुये उन्ही का अंधानुकरण करते है ।




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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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