Tuesday, 9 July 2013

Fwd: [BST] क्या आप जानते है, खनिजों के बाद सबसे बड़ी लूट रक्षा सौदों में होती है, खासकर रूस के साथ.......



---------- अग्रेषित संदेश ----------
प्रेषक: MahanDeshBharat <swarnimrashtra@gmail.com>


बंधुओं,

क्या आप जानते है, खनिजों के बाद सबसे बड़ी लूट रक्षा सौदों में होती है, खासकर रूस के साथ.......

१-रूस लिया जाने वाला गोर्शखोव कैरियर जहाज जो हमें १०००० करोड़ में २०१० में खरीदना था, अब उसी की कीमत हम २०००० करोड़ से ज्यादा देकर २०१३  के बाद लायेंगे,

२- जिन गोलों / बमों की कीमत भारतीय निर्माण प्रक्रिया में ८७०/- रुपये होनी चाहिए, वे गोले ९०००/- में मगाए गए थे कुछ सालों पहले,

३- रूस से हम जिन गोलों को ४०००/- से ज्यादा कीमत में खरीद रहे है, उसे हमारे देश में पहले से उपलब्ध सुविधाओं से ही मात्र ८००/- रुपये में बनाया जा सकता है, लकिन पता नहीं क्यों इसे हम भारत में ना बनाकर रूस से मगवाते है, यदि रक्षा उत्पादन भारत में किया जाये तो हमारा ५ गुना खर्चा बच जय और हम लाखो लोगो रोजगार दे सकते है, इस पर तो बहस होनी चाहिए.

४- जितने माल का सौदा होता है, क्या उतना सचमुच में आता ही है, इसके हिसाब की चर्चा आजतक नहीं की गयी सिर्फ गोपनीयता के नाम पर रक्षा सौदों में भयंकर लूट  जारी है, हिसाब न मिले इसलिए कभी  कभी  इन गोदाम में ही आग लगा दी जाती है, आज तक किसी भी आग की रिपोर्ट जनता को नहीं बताया गया जब की पैसा जनता ही देती है.

५-जब से हमने रक्षा में अकूत पैसा का सौदा करना शुरू किया है, तब से हमने कोई परोक्ष लड़ाई नहीं लड़ी है इसलिए हमारी पोल पट्टी छिपी हुई है, आयातित माल की क्या गुणवत्ता है, यह बहुत ही गोपनीय मामला है,

६- जब जब माल खरीदने का प्रोग्राम बनाया जाता है उससे पहले हमारी भ्रष्ट मिडिया और अखबार जनता के बीच  माहौल बनाना शुरू कर देते है जिससे  लगे की मामला वास्तव में बहुत गंभीर है और हमारे देश भक्त लुटेरे  बहुत सही टाइम पर निर्णय ले पा  रहे है, इनसे होशियार कोई नहीं है, टीवी पर चीन की तयारी का जिक्र शुरू  कर दिया जाता है, जनता को डराकर एक हौवा खड़ा कर दिया जाता है.

७- कोई भी देश हमें तकनीक नहीं देता है सिर्फ , ५-६ गुना दाम लेकर उल जलूल माल हम खरीदकर कमीशन पा  लेते है, बोफोर्स तो सबसे छोटा सौदा था, मात्र १४०० करोड़ का, आज तो सौदे लाखो करोड़ के होते है, स्विस और अन्य बैंको में जमा कला धन इसी का कमीशन है, एक जमाना था जब रूस से हमने दुनिया में सबसे ज्यादा खरीदा. रूस की सरकार कमीशनखोरी को गलत नहीं मानती है, यही हाल  अन्य पश्चिमी देशों का भी है,

सवाल उठता है, जब हम यह सब रक्षा उत्पादन उपने देश में लाखो लोगो के लिए रोजगार  पैदा करते हुए कर सकते है तो इसे करने के लिए किसने रोका है.

इसका एक मात्र कारन है- हमारे रहनुमाओं के खून में बसा हुआ भ्रष्टाचार,

भ्रष्टाचार वाही करता है जिसका ज़मीर बिक जाता है,  यानी उसे सुधार नहीं जा सकता है, उसे सिर्फ व्यवस्था से बहार करके जेल में भेज देना ही एकमात्र उपाय है,

अब देखना है की इस जड़ जमाये बीमारी का पक्का इलाज किस देशभक्त के पास है,

शायद भारत स्वाभिमान  के पास?????? बाबा-मोदी-स्वामी को अपनी ताकत दीजिये...
वन्दे मातरम
  
 




-- --संजय कुमार मौर्य, अयोध्या, फैजाबाद, उ.प्र.