Wednesday, 30 October 2013

भारतीय पेरेन्टस की मूर्खता और सेकुलरो से दिवाली का प्रश्न

मेरे भारत के पेरेन्टस कितने ज्यादा मूरख होते है ये मोहल्ले में कोई बच्चा अगर थोडा खेलने कूदने में कमजोर हो या कोई थोडा सा अवारा हो तो अपने बच्चे से बोलते है की उसके पास ना जाना , उससे दूर रहना !!

लेकिन जिस धारावाहिक में वेश्याओं को बुलाया जाता है, या जिस नाटक में सबसे ज्यादा गाली गलोच होती है वैसे नाटक को पेरेन्टस बच्चो को देखने देते है ?
आश्चर्य तो तब होगा है जब पेरेन्टस भी देखते है !!

( जी हाँ, मै बिगबोस और रोडीस की बात कर रहा हूँ )

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Wikipedia के अनुसार, भारतीय लोग मात्र में एक दिन में 3,182,000 बेरल इस्तेमाल करते है ।
ये पूरा होता है पूरा का पूरा 505897573 लीटर , बोले तो 50 करोड लीटर !
हाँ जी, हम भारतीय लोग 50 करोड लीटर पेट्रोल फूँक डालते है । अब क्या आप जानते है, इसके कारण कितना सारा प्रदूषण होता है ? सोचे कितना सारा धुँअा निकलता होगा ??

अब सेकुलर लोगो को ये प्रदुषण तो दिखेगा ही नही ? उनको तो दीवाली में प्रदुषण दिखेगा ,
सेकुलर लोगो को नये साल के पटाखो का प्रदूषण तो दिखेगा ही नही ?? उनको तो दिवाली में प्रदूषण दिखेगा !!
सेकुलर लोगो को बकरीद पर मुँह में दही जम जाता है लेकिन होली में प्रदूषण जरूर दिखेगा ।

जब बकरीद पर गाय बकरी काटने पर रोक लग जायेगी तब मै दिवाली पर पटाखे फोडना बंद कर दूँगा ।
तब तक मै तो खूब पटाखे फोडूँगा ।


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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