Thursday, 28 November 2013

फेसबुक पर दिवाली इस्पेशल मेसेज


दिवाली इस्पेशल
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Wikipedia के अनुसार, भारतीय लोग मात्र में एक दिन में 3,182,000 बेरल इस्तेमाल करते है ।
ये पूरा होता है पूरा का पूरा 505897573 लीटर , बोले तो 50 करोड लीटर !
हाँ जी, हम भारतीय लोग 50 करोड लीटर पेट्रोल फूँक डालते है । अब क्या आप जानते है, इसके कारण कितना सारा प्रदूषण होता है ? सोचे कितना सारा धुँअा निकलता होगा ??

अब सेकुलर लोगो को ये प्रदुषण तो दिखेगा ही नही ? उनको तो दीवाली में प्रदुषण दिखेगा ,
सेकुलर लोगो को नये साल के पटाखो का प्रदूषण तो दिखेगा ही नही ?? उनको तो दिवाली में प्रदूषण दिखेगा !!
सेकुलर लोगो को बकरीद पर मुँह में दही जम जाता है लेकिन होली में प्रदूषण जरूर दिखेगा ।

जब बकरीद पर गाय बकरी काटने पर रोक लग जायेगी तब मै दिवाली पर पटाखे फोडना बंद कर दूँगा ।
तब तक मै तो खूब पटाखे फोडूँगा ।
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दिपावली में पटाखे जरूर फोडे ।

उसका कारण ये है कि -
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हिंदूओ के बच्चो के पास एक मात्र यही तो त्योहार है जहाँ से वो बहादुर बन सके । आप डिस्कवरी पर देखे की कैसे सभी प्रकार की जन जातियाँ और आदिवादी लोग , बच्चो को मर्द लोग के लिये अजीब अजीब से कष्टदायी धार्मिक अनुस्ठान करते है । खतरो से खेलने से बच्चो के मन में बहादुरी आती है वरना आप शहर के उन हिंदू बच्चो को देखे जो शुरू से ही जो "अच्छे बच्चे" की बनने के चक्कर मे धूल में ना खेले, लडाई ना की और पटाखे ना फोडे और ४ साल की उमर से ही उँगली से मोटा चश्मा पहने रहते है ऐसे बच्चे सामान्य कुत्ते से लेकर छोटे से कीडे को देखकर रोना आ जाता है, पटाखे फोडने पर पसीना आ जाता है, और आवाज की धमक से परेशान हो जाते है ।

खैर फैसला आपका की आप अपने बच्चे को भीरू बनाना चाहते है या व्यवहारिक ?

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दीपावली के दिन की अधूरी शुभकामनायें !!

अधूरी इसलिये क्योंकि दीपावली का दिन तो राम और लक्ष्मी का दिन होता है, और राम जन्म दिन भूमी में राम की मूर्ती तंबू में है, और लक्ष्मी जी स्वीस बैंक में ।

वैसे भी अब भारत के लोग दीपावली की जगह अब "LED Festival" मनाते है । भारत को जगमग करने का ठेका चीन के ले लिया है जिसके कारण हर साल अरबो खरबो रूपये चले जाते है चीन को और चीन वाले "धीन चाक धीन चाक" करते है और भारत वालो को समझ में नही आता है की आखिर पैसे की वैल्यू क्युँ गिर रही है ।

 
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ऐसे बच्चे कभी आत्मरक्षा कर पायेंगे उन लोगो से जो बचपन से तमंचो से खेलते है ? या फिर जान बचाने के खातिर देश भी गद्दारी कर देंगे ??



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मीडीया -- ये देखो, ये त्योहार के नाम पर पैसे की बर्बादी कर रहे है -- ब्रेकिंग न्युज
फेसबुकिया - भाई टाईम बडा या पैसा ??
मीडीया -- टाईम
फेसबुकिया - तो भाई, क्रिकेट मैच के दौरान करोडो लोगो को कितना सारा टाईम बर्बाद हो जाता है ?
मीडीया -- तुम्हारे पीछे RSS का हाथ है !! ----%$#%#$#$%$&


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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कभी कभी मुझे लगता है मेरे ३० साल की जिंदगी भी ऐसे ही Time waste हो गई

मुझे क्रिकेट बिल्कुल पसंद नही है ।
बचपन में एक दो खेलने का प्रयास किया लेकिन रास ना आया ।
कारण ?
अरे भाई, ग्राउंड पर उस हिस्से पर खडा कर देना जहाँ पूरे २ घंटे में मात्र ५ बार बाल आती हो और बैटिंग के समय सबसे आखरी में मात्र ३ गेंद की पारी खेलना ।
मुझे साफ नजर आता था की ४ घंटे के खेल में मेरा जो योगदान रहा वो नगण्य है और मै इसे "टाईम waste (बर्बाद)" करने का तरीका मानता हूँ।

कभी कभी मुझे लगता है मेरे ३० साल की जिंदगी भी ऐसे ही Time waste हो गई । पिछले ३० साल जिंदगी से निकल गये और पता ही नही लगा ।

गणित से सिद्धांत में ये होता है की अगर किसी वस्तु पर चारो तरफ से समान बल लगे तो परीणाम शून्य होगा है , टीक वैसा ही होता कभी कभी लाईफ में ।

मुझे इतनी बात साफ पता चल गई है की कुछ कर गुजरने की ताकत सबसे ज्यादा १०-३० साल के बीच ही होती है और हमारी सरकार के बडा ही रोचक सिस्टम बनाया है जिसके चलते
बिगडा बच्चे के लिये शराब, सिगरेट , सिनेमा , लडकीबाजी जैसी तमाम चीजे बनाई है जिसके चलते एक बिगडा बच्चा १०-३० सालो के बीच कुछ कर ना पाये ।
इसके ठीक समानांतर अच्छे बच्चे के लिये पडाई का चक्रव्हयु बनाया है जिसमें बच्चे को मात्र रट्टाफिकेशन , डिग्रीकलेक्शन के अलावा कुछ बचता ही नही है । जिसमें काफी बच्चे जो IIT जैसे जगह जाने चाहते है तो उनके पिता माता ७वी कक्षा से उसको ट्युशन भेजना चालू कर देते है और बच्चा इतना पढता है की उसको व्यवहारिक ज्ञान शून्य हो जाता है। २५-२८ साल तक तो बस पडाई ही चलती रहती ।

अच्छा बच्चा हो या खराब, सबको पूरी तरह "engage " करने के पूरे उपाय है, मात्र इसलिये की १०-३० की उमर वाले अगर विचारक बन जाये या सोचने लग जाये तो सत्ताधीसो का क्या होगा । २५-३० साल में जब इंजीनीयर कमाने लगता है तो उसको पैसे की अहमियत ही नही पता होती है, मेरे काफी दोस्त है वो १ लाख महीना तक कमाने है लेकिन क्रेडिट कार्ड (उधार) पर जिंदा है, सारी सेलेरी कब उडा देते है पता ही नही चलता ।

इसके अलावा ३० साल की उमर मे जब इंसान कमाने लग जाता है तो समाज का प्रेशर बन जाता है की कोई फ्लेट ले लो और बन जाओ गुलाम अगले १०-२० सालो के लिये । जिस तरह माता पिता सारी कमाई शादी/पडाई में लगा देते है उसी चक्र में आप ३० साल के बाद शामिल हो जाते हो ।

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खैर, मुझे जो लगता है की,

१) पढाई की उमर कम कर देना चाहिये , कैसे १० वी तक का पाट्यक्रम मात्र ५-६ सालो में कवर करा देना चाहिये ।
२) कम उमर में कमाने को बडावा देना चाहिये जिससे की बच्चे लोग पैसे की अहमीयत को ज्यादा समझे ।
३) पढाने का मुख्य काम मात्र साक्षर और कुशल बनाना होना चाहिये । हमारी शिक्षा प्रणाली सबको PHD करवाना चाहती है । कम उमर से नौकरी होने के बाद इंसान अपने ही क्षेत्र में मुख्य पडाई करेगा । जैसे मै तो गणित का विद्यार्थी लेकिन मुझे केमेस्ट्री काहे पढा दी ? और पढाई तो पढाई पर ऐसी कैसी जिसमे मुझे मेरे शरीर से लिये घातक कोकोकोला मैगी चीजो के बारे में बताया ही नही ।
४) १५ साल से बच्चो को बैंक अकांउट बनाने देना चाहिये ।

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उमडते विचारो को लिखने की नाकाम कोशिश कर रहा हूँ, हो सकता है की मै गलत हूँ , !!


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
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विदेशी सामान उपयोग करने का कुतर्क

कुछ लोग इतने ज्यादा कुतर्की होते है की उनके आगे भगवान के तर्क भी फेल हो जाये,

अब दिल्ली में पाये जाने मंदबु्द्धी लोगो से मै अगर सब्जी मंडी में जाकर कहता हूँ की भाई ये चाईना का अदरक और अमेरीकन बादाम मत लो, देशी सामान खरीदो तो बोलते है की ये चाईना का अदरक मँहगा है, और ये बादाम भी ज्यादा मँहगा है , मँहगा बोले तो ज्यादा बेतर क्वालिटी ।

अगर में इसको सदर बाजार जाकर या किसी खिलोने कि दुकान पर जाकर बोलता हूँ कि विदेशी सामान मत खरीदो, तो पलट कर जबाव मिलता है, भाई ये विदेशी सामान सस्ता मिलता है, देशी कंपनी से बोलो की कोमपीटीशन करे और सस्ता बनाये ।


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मुंबई ताज होटल जेहादी हमला

कितनी ज्यादा मानसिक गुलामी घुसी हुई है भारत में, इसके लिये ये उदाहरण ही काफी है।

कुछ सालो पहले भोपाल में जहरीली गैस उडी थी, जिसको "भोपाल गैस त्रासदी" कहा गया, ऐसे ही भुज के भूकंप को "भुज का भूकंप" कहा गया । जब भी कोई त्रासदी होती है तो उसका नाम होता है । जैसे "कारगिल युद्ध" । मुंबई में भी एक हमला हुआ था, जिसका नाम नाम "२६/११" दे दिया गया । ये नामकरण सेकुलर मानसिक गुलामों ही देन है । अरे भाई, अमेरीका ने ९११ नाम रख दिया तो तुमने भी २६/११ नाम रख कर अपनी अमेरीका के प्रति मानसिक गुलामी का परिचय दे दिया । अगर ९११ का हमला नही हुआ होता तो आज मुबंई हमले को हम -- "मुंबई ताज होटल जेहादी हमला" कहते ।


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Kishan Pan Center

आप की बात सुनकर एक कहानी याद आ गई, नाथूपुर गाँव जहाँ ठीक से बिजली भी नही आई वहाँ किशनलाल ने पान की गुमटी खोली । लेकिन गुमटी के उपर लिखा - "Kishan Pan Center, " मजे की बात ये है कि गाँव में किसी भी अंग्रेजी नही अाती है । जब पूछा गया कि अंग्रेजी काहे इस्तेमाल किया तो बोला की -- "गाँव में कभी विदेशी आ गये तो उनको दिक्कत नही पडं जायेगी" ।

बस यहीं मानसिक गुलामी घुस गई है सरकार में और आम जनता में ।

बचपन में दादा दादी शब्द बोलना सीखे ना सीखे, लेकिन ABCD को माँ बाप जरूर सिखा देंगे । टीवी पर विज्ञापन में ऐसे दिखाया जाता है की अगर आपका बच्चा १ दिन भी पीछे हो गया तो उसकी जिंदगी नर्क बन जायेगी और उसे सडक पर भीख माँगनी पडेगी । ये अंग्रेजी की अंधगुलामी ने देश का कबाडा कर दिया है । अच्छा खासा कमाने वाले "CREDIT CARD" लेकर घुमते मिलेंगे । लेकिन इन कार्डो को हिंदी में बनाया जाये तो लिखा होगा "उधार पत्रक" । लोग शरम के मारे रखना ही छोड देंगे । मतलब साफ है , स्वभाषा (हिंदी, गुजराती, तमिल तेलगु) में काम किया जाये तो हमें हर चीज के पीछे के भावना पता रहता है और उसके साथ ही सही गलत के निर्णय की क्षमता बडती है ।


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Wednesday, 20 November 2013

मोदी की रैली की भीड ।


Crowds throng to NaMo's speeches: Images media will never show you
September 27, 2013
  
Gujarat Chief Minister Narendra Modi: gathering at a public rally addressed by Modi in Mumbai on Monday.
Modi in Mumbai
 
 
Narendra Modi's public rallies draw mammoth crowds each time. The sheer scale of these gatherings boggles the imagination. As the images below demonstrate, this is one aspect of Modi's public appearances that goes largely unmentioned in mainstream media accounts.
Bhopal rally. (Image credit :@nisheethsharan)
 
Rally in Hyderabad
 
Sea of people at Hunkaar Rally, Patna
 
Sea of people at Hunkaar Rally, Patna
 
NaMo in Udaipur, Rajasthan
 
Rally in Rewari , Haryana
 
Rally in Jaipur, Rajasthan.
 
Rally in Hyderabad.
 
Supporters of India's opposition party Bharatiya Janata (BJP), gather for a rally in Bhopal, India, Wednesday, Sept. 25, 2013. The rally was addressed by Gujarat state chief minister Narendra Modi and senior leader Lal Krishna Advani, among others.
NaMo rally in Bhopal
 
Rally in Tamil Nadu.
 
NaMo in Delhi

Tuesday, 19 November 2013

राष्ट्रवादी वैचारिक संस्थानो के लिये "online book/cd selling website" मुफ्त

अगर आप कोई पुस्तके बेचते है या प्रकाशक है, या आप ऐसे किसी को जानते है तो आप उनको मेरा मुफ्त का आँफर जरूर दे दीजिये । मै आपके लिये मुफ्त की "Online Selling" बेबसाईट बनाकर दे सकता हूँ , जहाँ से आप अपनी किताबे ओनलाईन बेच सकते है, जैसे flipkart, snapdeal करता है ।

मुफ्त मुफ्त मुफ्त मुफ्त मुफ्त मुफ्त

जी है मुफ्त में (क्योंकि मेरा पेट भरा है) पर शर्त एक ही है,
शर्त ये है कि प्रकाशन किसी राष्ट्रीय कार्य से जुडा है, जैसे RSS  की किताबे, या फिर राजीव दीक्षीत की विचारधारा के लिये बने प्रकाशन समूह  या जैसे बाबा रामदेव या फिर आशाराम बापू जी का सत्साहित्य या फिर गीताप्रेस जैसे अच्छे प्रकाशन समूह।

मै ऐसा क्युँ कर रहा हूँ,
क्योंकी अच्छे विचारो को प्रमोशन नही मिल पा रहा है उनकी कितावे Flipkart / Snandeal जैसी जगह मिलती ही , बडी दिक्कत आती है, इसलिये मैने ये कदम उठाया है ।इसके अलावा मार्केट में वेबसाइट बनाने के नाम पर कई कंपनीयाँ है जो ३०,००० रूपये बडी आराम से ले लेती है । इस चक्कर में "वैचारिक संस्थान" अपनी साईट भी नही बना पाते है, और दूसरी तरफ फोर्ड से मदद लेकर दूसरे लोग वेबसाइट से लेकर SMS तक घुस जाते है ।

आप क्या कर सकते है ।
१) आप ऐसे "वैचारिक संस्थान" से जुडे है या आपको पता है , तो आप उनको मेरा संपर्क दे सकते है ।
२) आप खुद भी सीख सकते है, (Wordpress + Woocommerce Plugin )

मुझसे संपर्क का रास्ता
narendra@narendrasisodiya.com

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│  नरेन्द्र सिसोदिया
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Boycott Commonwealth Games and Commonwealth

Sunday, 17 November 2013

Fwd: These images will "Fire" your brain & Main Stream media will never show you

The purpose of Email is just to show some images which main stream media will not show you. See the images and decide yourself what illegal activity is happening is India by the Christian Missionaries using billion Dollar foreign funds!


जीजस महामंत्र , जीजस सहस्त्रनाम
==== Copy Paste from Vishu Sahastranam  ====






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जीजस नमस्कार
Copy Paste From Surya Namaskar



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Mother Merry as mother of Shri Ganesha


And Do not forget to visit http://www.ocoy.org/

Where they CLAIM YOGA belongs to Christian !

Jesus Meditating with Om
 


PS: Sorry if it hurt you !





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│  नरेन्द्र सिसोदिया
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Saturday, 16 November 2013

हिंदू खतम हो जायेंगे एक दिन

जिस देश में लक्ष्मीबाई तलवार लेकर घूमती थी, आज उस देश की लडकीयाँ कंडोम लेकर घुमती है ।
 

World of Free Software and Why Govt need to adopt FOSS

Tuesday, 12 November 2013

सत्य दवाई की तरह होता है, रोज घूँट घूँट पिलाना चाहिये,

कल दिल्ली में भूकंप के झटके आने के कारण मै रात भर सो ना सका । सुबह ४ बजे सो पाया ।
शायद ३-४ बार झटके आये होंगे पर मै दो बार नीचे गया । मेरे मोहल्ले के सारे के सारे लोग सो रहे थे, बस इक्का दुक्का लोग मेरे जैसे नीचे आ गये थे ।

मेरे मन में एक ही सवाल था २-३ झटको के बाद भी मेरे मोहल्ले के लोग जागे ना कोई कुत्ता बिल्ली । बस मै ही अकेला नीचे खडा था । चूँकि मै "सत्य" जान चुका था इसलिये घर के अंदर जा नही सकता था और बाकी लोग जो अज्ञानवश सोये हुये थे वो सब अज्ञानतावश सो रहे थे ।

एक पल के लिये ऐसा लगा की मै "सत्य" का झंडा लेकर अकेला खडा हूँ । और जो शायद राजीव दीक्षित और बाकि क्रांतिकारीयों को महसूस करते है वही मैने महसूस किया । अगर आपको सत्य पता होता है तो आप चाहकर भी अपने दायित्व से दूर नही जा सकते ।  एक बार मैट्रीक्स से बाहर आने के बाद आप बाकि लोगो को भी बाहर निकालने के कार्य में लग जाते हो ।

लेकिन आपको ये जानना चाहिये कि अज्ञान के अंधकार में फँसे लोगो को एक दिन में सत्य बताकर बाहर नही निकाल सकते है, सत्य दवाई की तरह होता है, रोज घूँट घूँट पिलाना चाहिये, सारी बोतल एक साथ पिलाने का फायदा नही होता है । अगर आपको सत्य का पता लग जाता है तो आप सत्य को पकड लो । लोग धीरे धीरे जागेंगे । मतांतर या जागरण की क्रिया बहुत धीरे धीरे होती है

नरेन्द्र सिसोदिया

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Friday, 8 November 2013

बैंकिग सिस्टम में सुधार होना चाहिये ।

बैंक का काम बस पैसे सुरक्षा और लेन देन की सुरक्षा तक ही होना चाहिये । लोन, ब्याज और फलाना ढिकाना जैसे कोई भी काम करना नही होना चाहिये ।  जैसे कोई आपके पास २० रूपये है और आप बैंक में दे दो, जब निकालना हो निकाल लो । ब्याज मिलना ही नही चाहिये, बैंकिग पूरी तरह "profit less" कर देना चाहिये । बैंक आपको १% फयादा देकर पता नही कितना लाभ लेता है । बैंकिग सिस्टम में सबसे ज्यादा फायदा बैंक वालो को ही मिलता है । वो इस फायदे को बडाने के चक्कर में क्या क्या नही करते । पूरी तरह से economy को गुलाम बना कर रख दिया है । लोग मूरख की तरह सोचते है की ब्याज मिल रहा है लेकिन ये क्युँ नही सोचते की पैसे की वैल्यू भी तो घट रही है । पहले १०० रूपये में शादी हो जाती थी अब २ लाख में भी नही होती है । अगर आपने बैंकिग सिस्टम से १०० रूपये से १०,००० बना भी लिये तो कौन सा बडा काम कर दिया । बैंकिग सिस्टम पूरी तरह से सरकार के पास चला जाना चाहिये  और सारी बैंकिग सर्विस (जैसे लोन, ब्याज, गिफ्ट, ) जैसे सारी फालतू की सर्विस बंद कर देना चाहिये । बैंकिग सिस्टम का बस २ ही काम होना चाहिये ।

१) पैसे आपके अंकाउट में डालो (ब्रांच जाकर) ,
२) पैसे को निकालो  (ATM) या ओनलाईन ट्रांसफर कर दो (INTERNET TRANSFER) !

जितना डालोगे उतना ही मिलेगा, ना पैसे कटना चाहिये ना पैसा बडना चाहिये । बैंकिग सिस्टम हमारा नौकर है जिसको हमने हमारी अर्थव्यवस्था में होने वाले लेन देन को सरल बनाने के बनाया था, ना की अर्थव्यवस्था चलाने के लिये । ये नौकर हमारा मालिक बन गया । हो सके तो एक बैंक कर दो |

फिलहाल में ऐसा सोच रहा हूँ, आपकी राय चाहिये ।

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Thursday, 7 November 2013

भारतीय बैंकिग सिस्टम में घुसपैट -CITI HSBC की चाल

ये देखो, विदेशी बैंकर माफिया के गुलाम (RBI का सेनापति) ने आते ही अपने रंग ढंग दिखाना चालू कर दिया । विदेशी बैंकिग सिस्टम को मजबूत करने से लिये ये RBI आरबीआई के नये नियम लाना चाहता है ।
विदेशी बैंक जैसे CITI , HSBC जैसी बैंक को अब ये WOS सेटअप करने की छूट देने वाले है ।
WOS का मतलब होता है - Wholly Owned Subsidiary , और इन WOS को नैशनल बैंक जैसे अधिकार प्राप्त होंगे ।
ये विदेशी बैंको वाली की जाने बहुत बडी घुसपेट है । हमे इसका विरोध करना चाहिये ।
Thu Nov  7 10:23:01 IST 2013

#illuminati, #rbi, #banking #bharat
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Tuesday, 5 November 2013

प्रतिभा पलायन

एक टाईम था, जब मै गाँव में रहता था, आज मै दिल्ली में रहता हूँ, मेरी सेलेरी का अधिकतम हिस्सा दिल्ली में ही खतम हो जाता है, मेरे कमाये हुये पैसे फिलहाल तो ना मेरे गाँव के काम आ रहे है ना ही मेरे जिले के । जब जिला से पहली बार मेरा दिल्ली के कोलेज में हुआ था तो पेपर में १० लाईन का बधाई पत्र भी छपा था । जब लोगो ने पढा था उनको शायद खुशी हुई
थी की हमारे जिले का लडका दिल्ली जायेगा । फायदा होगा ।

अब मुद्दे की बात !!

काफी होशियार लोग "प्रतिभा पलायन" का समर्थन देते हुये कहते है की जो देश के बाहर जायेंगे उससे देश का ही भला होगा । जबकी हकीकत यह है जो जहाँ रहता है वो वहाँ की ईकोनोमी को ही फायदा देता है । (जैसे मै दिल्ली का फायदा करा रहा हूँ, अपने जिले का नहीं)
हाँ अगर आप २-३ साल के लिये विदेश चले जाओ और मोटा माल लेकर यहाँ कुछ चालू कर दो तो ये अच्छी बात है वरना तो वहाँ रहने से तो वहाँ का का ही फायदा होता है ।


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Monday, 4 November 2013

TV के कार्यक्रमों में मानसिक गुलामी की अचार बडी प्यार से परोसा जाता है

TV के कार्यक्रमों में मानसिक गुलामी की अचार बडी प्यार से परोसा जाता है, इतनी प्यार से बडे से लोग और गुलाम ही होते जा रहे है ।
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TV पर एक भाई रो रहा है की मेरी बहन का बडे अंग्रेजी स्कूल में दिखाला कर दो, अरे भाई, मेरे IIT में काफी बच्चे थे जो हिंदी मीडीयम थे और होशियार है, सारे बडे कोचिंग क्लास हिंदी वाले बैच लगाते है और अच्छा खासा रिजल्ट निकाल देते है ।
मात्र २-३% से ज्यादा लोगो को अंग्रेजी की जरूरत नही है । और विदेश जाने वाले तो वैसे भी 0.0001 % से कम है ।फिर काहे थोप रहे अंग्रेजी ।
मैने जिन कंपनी में काम किया है सबमें हिंदी में ही बोलचाल होता है, मात्र email और presentation ही english में होता है । मैने तो सारे interview हिंदी में ही लिये है और दिये है ।
अंग्रेजी सिखो, संस्कृत सीखो, तमील सिखो, जितनी भाषा सिखनी हो उतनी सिखो लेकिन पढाई लिखाई उसी भाषा में हो जिसमें आपका दिमाग सोचता हो । अगर आप ऐसा नही करते हो तो बहुत बडी गलती करते हो ।

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