Tuesday, 5 November 2013

प्रतिभा पलायन

एक टाईम था, जब मै गाँव में रहता था, आज मै दिल्ली में रहता हूँ, मेरी सेलेरी का अधिकतम हिस्सा दिल्ली में ही खतम हो जाता है, मेरे कमाये हुये पैसे फिलहाल तो ना मेरे गाँव के काम आ रहे है ना ही मेरे जिले के । जब जिला से पहली बार मेरा दिल्ली के कोलेज में हुआ था तो पेपर में १० लाईन का बधाई पत्र भी छपा था । जब लोगो ने पढा था उनको शायद खुशी हुई
थी की हमारे जिले का लडका दिल्ली जायेगा । फायदा होगा ।

अब मुद्दे की बात !!

काफी होशियार लोग "प्रतिभा पलायन" का समर्थन देते हुये कहते है की जो देश के बाहर जायेंगे उससे देश का ही भला होगा । जबकी हकीकत यह है जो जहाँ रहता है वो वहाँ की ईकोनोमी को ही फायदा देता है । (जैसे मै दिल्ली का फायदा करा रहा हूँ, अपने जिले का नहीं)
हाँ अगर आप २-३ साल के लिये विदेश चले जाओ और मोटा माल लेकर यहाँ कुछ चालू कर दो तो ये अच्छी बात है वरना तो वहाँ रहने से तो वहाँ का का ही फायदा होता है ।


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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