Thursday, 28 November 2013

Kishan Pan Center

आप की बात सुनकर एक कहानी याद आ गई, नाथूपुर गाँव जहाँ ठीक से बिजली भी नही आई वहाँ किशनलाल ने पान की गुमटी खोली । लेकिन गुमटी के उपर लिखा - "Kishan Pan Center, " मजे की बात ये है कि गाँव में किसी भी अंग्रेजी नही अाती है । जब पूछा गया कि अंग्रेजी काहे इस्तेमाल किया तो बोला की -- "गाँव में कभी विदेशी आ गये तो उनको दिक्कत नही पडं जायेगी" ।

बस यहीं मानसिक गुलामी घुस गई है सरकार में और आम जनता में ।

बचपन में दादा दादी शब्द बोलना सीखे ना सीखे, लेकिन ABCD को माँ बाप जरूर सिखा देंगे । टीवी पर विज्ञापन में ऐसे दिखाया जाता है की अगर आपका बच्चा १ दिन भी पीछे हो गया तो उसकी जिंदगी नर्क बन जायेगी और उसे सडक पर भीख माँगनी पडेगी । ये अंग्रेजी की अंधगुलामी ने देश का कबाडा कर दिया है । अच्छा खासा कमाने वाले "CREDIT CARD" लेकर घुमते मिलेंगे । लेकिन इन कार्डो को हिंदी में बनाया जाये तो लिखा होगा "उधार पत्रक" । लोग शरम के मारे रखना ही छोड देंगे । मतलब साफ है , स्वभाषा (हिंदी, गुजराती, तमिल तेलगु) में काम किया जाये तो हमें हर चीज के पीछे के भावना पता रहता है और उसके साथ ही सही गलत के निर्णय की क्षमता बडती है ।


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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