Thursday, 28 November 2013

कभी कभी मुझे लगता है मेरे ३० साल की जिंदगी भी ऐसे ही Time waste हो गई

मुझे क्रिकेट बिल्कुल पसंद नही है ।
बचपन में एक दो खेलने का प्रयास किया लेकिन रास ना आया ।
कारण ?
अरे भाई, ग्राउंड पर उस हिस्से पर खडा कर देना जहाँ पूरे २ घंटे में मात्र ५ बार बाल आती हो और बैटिंग के समय सबसे आखरी में मात्र ३ गेंद की पारी खेलना ।
मुझे साफ नजर आता था की ४ घंटे के खेल में मेरा जो योगदान रहा वो नगण्य है और मै इसे "टाईम waste (बर्बाद)" करने का तरीका मानता हूँ।

कभी कभी मुझे लगता है मेरे ३० साल की जिंदगी भी ऐसे ही Time waste हो गई । पिछले ३० साल जिंदगी से निकल गये और पता ही नही लगा ।

गणित से सिद्धांत में ये होता है की अगर किसी वस्तु पर चारो तरफ से समान बल लगे तो परीणाम शून्य होगा है , टीक वैसा ही होता कभी कभी लाईफ में ।

मुझे इतनी बात साफ पता चल गई है की कुछ कर गुजरने की ताकत सबसे ज्यादा १०-३० साल के बीच ही होती है और हमारी सरकार के बडा ही रोचक सिस्टम बनाया है जिसके चलते
बिगडा बच्चे के लिये शराब, सिगरेट , सिनेमा , लडकीबाजी जैसी तमाम चीजे बनाई है जिसके चलते एक बिगडा बच्चा १०-३० सालो के बीच कुछ कर ना पाये ।
इसके ठीक समानांतर अच्छे बच्चे के लिये पडाई का चक्रव्हयु बनाया है जिसमें बच्चे को मात्र रट्टाफिकेशन , डिग्रीकलेक्शन के अलावा कुछ बचता ही नही है । जिसमें काफी बच्चे जो IIT जैसे जगह जाने चाहते है तो उनके पिता माता ७वी कक्षा से उसको ट्युशन भेजना चालू कर देते है और बच्चा इतना पढता है की उसको व्यवहारिक ज्ञान शून्य हो जाता है। २५-२८ साल तक तो बस पडाई ही चलती रहती ।

अच्छा बच्चा हो या खराब, सबको पूरी तरह "engage " करने के पूरे उपाय है, मात्र इसलिये की १०-३० की उमर वाले अगर विचारक बन जाये या सोचने लग जाये तो सत्ताधीसो का क्या होगा । २५-३० साल में जब इंजीनीयर कमाने लगता है तो उसको पैसे की अहमियत ही नही पता होती है, मेरे काफी दोस्त है वो १ लाख महीना तक कमाने है लेकिन क्रेडिट कार्ड (उधार) पर जिंदा है, सारी सेलेरी कब उडा देते है पता ही नही चलता ।

इसके अलावा ३० साल की उमर मे जब इंसान कमाने लग जाता है तो समाज का प्रेशर बन जाता है की कोई फ्लेट ले लो और बन जाओ गुलाम अगले १०-२० सालो के लिये । जिस तरह माता पिता सारी कमाई शादी/पडाई में लगा देते है उसी चक्र में आप ३० साल के बाद शामिल हो जाते हो ।

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खैर, मुझे जो लगता है की,

१) पढाई की उमर कम कर देना चाहिये , कैसे १० वी तक का पाट्यक्रम मात्र ५-६ सालो में कवर करा देना चाहिये ।
२) कम उमर में कमाने को बडावा देना चाहिये जिससे की बच्चे लोग पैसे की अहमीयत को ज्यादा समझे ।
३) पढाने का मुख्य काम मात्र साक्षर और कुशल बनाना होना चाहिये । हमारी शिक्षा प्रणाली सबको PHD करवाना चाहती है । कम उमर से नौकरी होने के बाद इंसान अपने ही क्षेत्र में मुख्य पडाई करेगा । जैसे मै तो गणित का विद्यार्थी लेकिन मुझे केमेस्ट्री काहे पढा दी ? और पढाई तो पढाई पर ऐसी कैसी जिसमे मुझे मेरे शरीर से लिये घातक कोकोकोला मैगी चीजो के बारे में बताया ही नही ।
४) १५ साल से बच्चो को बैंक अकांउट बनाने देना चाहिये ।

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उमडते विचारो को लिखने की नाकाम कोशिश कर रहा हूँ, हो सकता है की मै गलत हूँ , !!


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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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