Monday, 4 November 2013

TV के कार्यक्रमों में मानसिक गुलामी की अचार बडी प्यार से परोसा जाता है

TV के कार्यक्रमों में मानसिक गुलामी की अचार बडी प्यार से परोसा जाता है, इतनी प्यार से बडे से लोग और गुलाम ही होते जा रहे है ।
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TV पर एक भाई रो रहा है की मेरी बहन का बडे अंग्रेजी स्कूल में दिखाला कर दो, अरे भाई, मेरे IIT में काफी बच्चे थे जो हिंदी मीडीयम थे और होशियार है, सारे बडे कोचिंग क्लास हिंदी वाले बैच लगाते है और अच्छा खासा रिजल्ट निकाल देते है ।
मात्र २-३% से ज्यादा लोगो को अंग्रेजी की जरूरत नही है । और विदेश जाने वाले तो वैसे भी 0.0001 % से कम है ।फिर काहे थोप रहे अंग्रेजी ।
मैने जिन कंपनी में काम किया है सबमें हिंदी में ही बोलचाल होता है, मात्र email और presentation ही english में होता है । मैने तो सारे interview हिंदी में ही लिये है और दिये है ।
अंग्रेजी सिखो, संस्कृत सीखो, तमील सिखो, जितनी भाषा सिखनी हो उतनी सिखो लेकिन पढाई लिखाई उसी भाषा में हो जिसमें आपका दिमाग सोचता हो । अगर आप ऐसा नही करते हो तो बहुत बडी गलती करते हो ।

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│  नरेन्द्र सिसोदिया
│  स्वदेशी प्रचारक, नई दिल्ली
│  http://narendrasisodiya.com
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