Thursday, 16 October 2014

क्या भारत फिर से गुलाम होने वाला है ? - FDI + MakeInIndia

जब सचिन पैदा हुआ था उसी दिन उसके क्रिक्रेटर बाप ने बल्ला आ दिया था । खुद उसने ये बात बोली थी इंटरवय्यु में । मोदी जी और कलाम से लेकर कितने बच्चों ने बचपन में काम किया बडो का हाथ बटाया और आगे महान हुये । बचपन में डेनिस द मेनिस नाम का विदेशी धारावाहिक देखता था, उसमें वो बच्चा अखबार बाँटता हूआ दिखाया है। बचपन से काम करना कोई गलत बात नही है, खासकर अगर पापी पेट के लिये किया गया हो।

मेरी पिछली विदेशी कंपनी का विदेशी मालिक जब भारत आकर लेक्चर दिया था तो उसने यही बताया की वो बचपन से ही पडाई के साथ साथ कुछ ना कुछ काम करता रहा है, खुद का काम । और फिर कंपनी बना डाली ।
आज भी खुद का काम करने में और नया बिजनेस करने वाली बंसल जाति के बंदो ने पडाई करने के बाद फ्लिपकार्ट (Flipkart) बनाई । और भी कई कंपनी के मालिकों के जीवन को देखोगे तो "जाति आधारित" उनके गुणों ने उनका बहुत साथ दिया और एक खास प्रकार के माहौल में पले बडे बच्चे आज अपनी कंपनीयाँ खोल के बैठे है ।

आईआईटी (IIT)में जाना कितना मुश्किल है , बडे बडे शूरमा को पसीना आ जाये । पूरी दुनिया का सबसे कठिन इक्जाम होता है । अरविंद (Arvind Saraf) नाम का बंदे की रेंक १ (AIR1)आयी । इतनी बडी रेंक होने के बाद आईआईटी और बाद में दुनिया के सबसे बडे विश्वविद्यालय एम आई टी (Massachusetts Institute of Technology) से शिक्षा होने के बाद भी, और दुनिया की सबसे बडी कंपनी गूगल (Google) में काम करने के बाद उसने अपने पुरखों का साडी बेचने का धंधा चुना । उसने अपना ओनलाईन साडीस बेचने का पोर्टल खोल लिया । triveniethnics.com (Triveni Sarees) नाम से उसका पोर्टल आज खूब कमा रहा है ।

जरूरी नही है की आज आईआईटी कर के भी दूसरे की दुकान पर काम करो । पर ये सब होने के लिये धंधे करने वाली मानसिकता होनी चाहिये जो की खतम कर दी गई है । हमारी पीछली और ये पीडी सरकारी नौकरी के पीछे ऐसी दौड लगाई की अब देख कर लगता है की आने वाले समय में बची खुची उद्यमशीलता भी खतम हो जायेगी ।

ध्यान दो । देश का भला उद्योग ही कर सकते है और खासकर ऐसे जो बाहर माल बेचे ताकि विदेशी मुद्रा भंडार बडे।
दुनिया का कोई विकसित देश FDI के लिये नही रोता है ।
विकसित देशो में आईआईटी जैसे संस्थानो के पास हुये बच्चो को VC और बाकी लोग पैसा देकर बिजनेस खोलने की राह आसान कर देते है । सोशल नेटवर्क मूवी में दिखलाया है कैसे मार्क एक आईडिया से धीरे धीरे चलकर आज के फेसबुक तक पहुँचा ।

अरे भाई, आपको देश का विकास करना है तो इंटरप्रीनीयरशिप पर ध्यान दो । आपका देश से पढा बच्चा बाहर जाकर विदेशी कंपनीयों की जोब कर रहा है । जो यहाँ रह जाता है वो भी विदेशी कंपनीयों की जोब कर रहा है यही बैठे । कितनी दुःख की बात है जो कंपनीयों को भारत में ओफिस खोलने की परमीशन दे दी । नही देते तो उनको मजबूरन उनको भारत के बहुत सारे लोगों की जरूरत पडती और ज्यादा पैसा देना पडता । अब यहाँ ओफिस खोल दिया है तो १०० रूपये की जगह १० रूपये से ही काम चल जाता है कंपनीयों का ।

भारत की जनसंख्या १२५ करोड, अगर सारे लोग १००० रूपये का मोबाईल सेट खरीदे तो ये होता है १,२५,००० करोड, बोले तो १ लाख करोड । कितनी बडी राशी है ये, सच में बजट के आसपास । इससे भी कई गुणा पैसे मात्र मोबाईल खरीदने में चले गये भारत के बाहर । क्या हमारे पास विश्लेषक नही थे जो बता देते की अगले २० सालो में इतना बडा मार्केट होने वाला है । २० साल पहले, भारत सरकार भारत में ही मोबाईल और सेमीकंडक्टर की फैक्ट्रीयाँ लगा देती तो आज कई लाख करोड रूपये भारत में ही रहते वो चाईना नही जाते । आज भी क्या हम लोग भारत में भारत की ऐसी कंपनीयाँ नही बना सकते है जो अगले बीस सालों बाद की सोच के विकसित हुई हो और आने वाले समय में पैसे का बहाव रोके सकते । क्या मोदी जी भारत को आत्म निर्भर देश बना सकते है ।

आज दिल्ली के किसी भी माँल मे चले जाओ, मै आपको दावे से बोलता हूँ की आप जो बडा जोर लगाना पडेगा स्वदेशी कंपनीयों को ढूँढने में । FDI से जो कंपनीयों ने धावा बोला है उनके सामने भारत की उद्यमशीलता कब तक टिक पायेगी ? खुद ओबामा अपने नागरिको को बोलता है की शनिवार को आप लोकल दुकानों से सामान खरीदो । भारत जैसे लोकतन्त्रातिक देश में बहुत सारी ओनलाईन शोप है, और लाखों दुकाने है । अमेरीका में ओनलाईन में मात्र अमेजेन है और दुकान में वालमार्ट । भयंकर मोनोपोली और बेरोजगारी है वहाँ ।

किसी भी व्यक्ति जिसने अमेरीकी कंपनी को पास से देखा है (जैसे मै) उसे एक बात तो साथ स्पष्ट हो जाती है की अमेरीकी कंपनीयों को कोम्पीटीशन (प्रतियोगिता) से सख्त नफरत है । वे लोग मोनोपोली में विश्वास रखते है । आपको जानकर आश्चर्य होगा की मोनसेंटो ने सूअर पर पेटेंट किया हुआ है और जो आपको उनसे सूवर को पालने के लोये रोयल्टी देनी पडती है , अगर सूवर ने बच्चा दिया तो उसकी भी रोयल्टी देनी पडती है । किसान जो बीज से खेती करता है अगर उसने उसने नये बीज बना लिये तो जेल में जाना पडेगा । मोनसेंटो किसान से अनुबंध करवाता है की आप उसके बीज ने उगे पौधों को ही बेच सकते है नये पौधे से नये बीज पर कोई अधिकार नही है। (Google - Monsanto - Patent For a Pig (2006))

अमेजन नाम की कंपनी ने वन क्लिक पेंटेट ले लिया । आप फ्लिपकार्ट या स्नापडील (FlipKart SnapDeal) से शोपिंग करते हो तो शोपिंग करने के बाद आपको क्रेडिट कार्ड की डिटेल डालनी पडती है । मान लो फ्लिपकार्ट वाले आपने क्रेडिटकार्ड की सारी जानकारी पहले से ही रख ले ताकी आपको शोंपिग करते समय वो जानकारी फिर से ना डालने पडे । बस एक ही क्लिक से आपको शोपिंग हो जाये तो कैसे रहेगा ? अमेजन ने इस प्रकार से शोपिंग करने के तरीके को पेटेंट करवा लिया और बाद में तमाम दूसरी कंपनियों को पेटेंट मामले में फँसा कर अपने को प्रतियोगिता से आगे ले गई । (en.wikipedia.org/wiki/1-Click)

WTO, GATT करार से ये उल-जलूल पेटंट कानून भारत में आ रहे है ताकि विदेशी कंपनीयाँ अपने हिसाब से काम कर सके । ये सब पिछले २० साल से हो रहा है । और मोदी राज में और होगा ।

आप अगर ये बाते पहली बार सुन रहे है तो आपको मुझ पर यकीन नही आयेगा । पर सच बात तो ये है की ये सब होता है । बाहर की कंपनीयों असली सच्चाई सुनकर आपकी आत्मा काँप जायेंगी । इन कंपनीयों का बजट एक आम देश से कही ज्यादा होता है । दुनिया में अगर देश और कंपनीयों के बजट के आधार पर आप टोप १०० को देखेंगे तो ५१ कंपनीयाँ निकलेंगी और ४९ देश । आगे जाकर ये कंपनीयाँ इतनी ताकतवर होंगी की बैठे बैठे ये लोग किसी भी सरकार को ब्लेक मेल कर सकती है । और कर भी रही है । मैने सुना है पेप्सी कंपनी के जरीये अमेरीकी खूफियाँ (CIA) के एजेंट भारत आये थे । क्या भारत के उद्योगपति और खुद भारत इन कंपनियों के उत्पाद और उत्पात को सँभाल पायेगा । क्या भारत भी चाईना की तरह मजदूरों वाला राष्ट्र बन जायेगा ?

मै माननीय प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूँ की

१) पिछले २०-३० सालों में कोकोकोला और पेप्सी नाम की कंपनीयों ने भारत में कितना धन लगाया ? और कितना धन भारत के बाहर ले गई ? पिछले २० सालो से चली आ रही FDI से भारत को कितना फायदा हुआ है ?
२) क्या अमेरिका भी FDI करता है अपने देश में ।
३) माल लो, कल को विश्वयुद्ध हो गया । दुनिया से सारे देश खतम हो गये । मात्र भारत ही बच गया । अब आप बताओ, इस स्थिती में भारत का विकास हो सकता है ? अगर हो सकता है वो हम पूरी दुनिया को नजर अंदाज करके भारत को विकास क्युँ नही कर सकते है ?

मोदी जी आप बोल के तो देखो , आपके लिये तो लोग जान देने के लिये तैयार है । आप स्वदेशी का नारा बुलंद तो करीये , हम अपनी जान लगा देंगे ।

साभार - नरेन्द्र सिसोदिया


====== कैसी  होती है पूँजीवादी सोच और क्या सच में FDI से देश का भला होगा ? ======

अभी कुछ दिन पहले फ्रैन्चाईजी इंडिया का प्रगति मैदान में मेला लगा था । कोई वडा पाउ बेचने की फ्रैन्चाईजी बेच रहा था तो कोई होटल की तो कोई किसी चीज की ।
अधिक जानकारी - franchiseindia.com

मै और मेरे जैसे लोग सारी दुकान पर जा जाके बस एक ही बात पूछ रहा था की मेरे पास इतने पैसे है इंवेस्टमेंट के लिये, कितने टाईम में रीकवर हो जायेगा । कितना मुनाफा होगा ।

मैने भी काफी देखा । मेरा एक जगह मन ज्यादा लगा । पानी के बिजनेस में ।
पानी का प्लांट लगाने का प्लान समझ में आया जिसमें करोडो की इंवेस्टमेंट है अगर बैंक लोन दे देती है तो ठीक वरना मेरी इतनी बडी औकात फिलहाल तो नही है ।

उसने बताया की आपको ३-४ साल में सारा पैसा रिकवर हो जायेगा फिर मुनाफा ही मुनाफा । पानी की बोतल बेचने का झंझट ही नही, क्योंकि कंपनीवाले पूरा माल बेचने की गारंटी दे रहे है ।
४००० वर्ग फीट जमीन और ७ मजदूर लगेंगे कारखाने में । भोपाल से पास ठीक रहेगा । मजदूर भी मिल जायेंगे । उसमें पूरा लिख कर दिया की कितने की मशीन आयेगी कितना माल ८ घंटे की शिफ्ट में बनेगा और मजदूरों को कितना मिलेगा । ७ मजदूरों को महीने के कुल ७५,००० ही देने पडेंगे । बोले तो हम मजदूर को करीब १०,००० ।
बोलो भाई प्लान कैसा लगा ?

अब खास बात ।
इस प्लान से भोपाल के गाँव को कितना फायदा होगा ?
मुझे तो हर ३ साल में करोड रूपये आयेंगे । लेकिन मात्र ७ लोगो को रोजगार मिलेगा । उनको फायदा होगा लेकिन उनसे ज्यादा मुझे होगा और मुझसे ज्यादा मेन कंपनी को होगा जिसकी मै फ्रैन्चाईजी लेने की सोच रहा हूँ । दिल्ली में ऐसे बहुत से ईवेंट होते रहते है ।

अब सबसे खास बात ।
भारत सरकार जो makeinIndia FDI का कार्यक्रम चला रही है वो भी कुछ ऐसा है ।
फ्रैन्चाईजी इंडिया का प्रगति मैदान में मेले की तुलना आप भारत सरकार के मेक ईन इंडिया से कर सकते हो ।
मेरी तुलना आप विदेशी कंपनी के इंवेस्टर से कर सकते हो जो पैसे लगाने को तैयार है ।
भोपाल की तुलना में भारत ।
भोपाल के पास के गाँव के ७ मजदूरों की तुलना आप मेक ईन इंडिया से प्राप्त होने वाले नये रोजगार से कर सकते हो ।
जिस तरह मै ३ साल का टारगेट लेके इंवेस्टमेंट को रीकवर करने की सोच रहा हूँ वैसे ही मेक इन इंडिया के इन्वेस्टर लोगो ने भी टारगेट बना लिया होगा ।

आप आपको पूरी पिक्चर साफ है की कब और किसको फायदा होने वाला है । मैने अपने निजी जीवन के एक उदाहरण से पूँजी, पूँजीपति सोच को दिखला कर FDI और विदेशी कंपनियों की हकीकत पेश की है, आप खुद सोचे और विचार करे की भारत को किससे और कितना फायदा होगा । मै चाहता हूँ प्रधानमंत्री बस ये बता दे की FDI से भारत को कब कब और कितना कितना फायदा होगा और विदेशी कंपनीयों को कब कब और कितना कितना फायदा होगा ।

साभार - नरेन्द्र सिसोदिया



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Narendra Sisodiya
UI Architect @
Unicommerce
Delhi - Bharat